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Friday, 10 July 2020

Bin Bhag Mile na Dunia | बिन भाग मिले ना दुनियाँ में अमृत भोग

बिन भाग मिले ना दुनियाँ में अमृत भोग ।।


बिन भाग मिले ना दुनियाँ में अमृत भोग ।।

मधु होत अमृत के समाना, खाय प्राण तज देता स्वाना। 
मखियाँ करत गन्दगी नाना, घृत से ही प्राण वियोग ।।

मिश्री है अमृत से प्यारा, खर को देत तुरन्त जा मारा।
कौवा खाये नीम फल खारा, दाख पकयां गल रोग ।।

जहां कथा होती है हर की, वहाँ नही रहती रुचि नर की ।
के सोवे के बातां घर की, करण लग्या सब लोग ।।

जहां अप्सरा नर्तकी गावे, वहाँ जाकर सारी रैन बितावे ।
धुंकल कहे भाग सँ पावे, सत संगत सयोंग ।।

बोल नाथ जी महाराज की जय

Bhajan: बिन भाग मिले ना दुनियाँ में अमृत भोग | 
             Bin Bhag mile na dunia mein amrit bhog.

Tuesday, 10 January 2017

Binjari E Hans Hans Bol Pyari Pyari Bol | बिणजारी ए हँस हँस बोल

बिणजारी ए हँस हँस बोल,
प्यारी प्यारी बोल,
बाता थारी रह ज्यासी,
बिणजारो मत जाण बातां रह ज्यासी

कंठी माला काठ की रे माही रेशमी सूत
सूत बिचारा के कर जद कातण वाला कपूत

रामा तेरे बाग़ में रे लाम्बी भदी खजूर
चढूं तो मेवा चाख ल्यूं पड़ते ही चकनाचूर

बालपणे में भज्यो नहीं रे करयो न हरी से हेत
अब पछताया के होव जद चिड़ियाँ चुग़ गयी खेत

टान्डो थारो लद गयो रे होगी लाद प लाद
रामानंद का भणे कबीरा बैठी मोजा मार
बाता रह ज्यासी....


जय श्री नाथ जी महाराज की


Sunday, 8 January 2017

Mangal Ki Mool Bhawani Sharna Tera Hai | मंगल की मूल भवनी शरणा तेरा है


मंगल की मूल भवनी शरणा तेरा है,
शरणा तेरा है, आसरा तेरा है, शरणा तेरा है ॥टेर॥

मैया है ब्रह्मा की पुतरी, लेकर ज्ञान सवर्ग से उतरी,
आज तेरी कथा बनाय देई सुथरी, प्रथम मनाया है ॥1॥

मैया भवन बणा जाली का, हार गूंथ ल्याया है माली का,
हो ध्यान घर कलकत्ते वाली का, पुष्प चढ़ाया है ॥2॥

मैया महिषासुर को मर्या, अपने बल से धरण पछाड्या,
हो हाथ लिये खाण्डा दुघारा, असुर संघार्या है ॥3॥

कहता शंकर जटोली वाला, हरदम रटे गुरां की माला,
हो खोल मेरे हृदय का ताला, विद्या बर पाया है ॥4॥

Song: मंगल की मूल भवनी शरणा तेरा है,





Aav Sakhi Dekha Ganpat Lyrics | आव सखी देख गणपत घूम है

आव सखी देख गणपत घूम है ॥टेर॥  

लम्बी सूँड मतवाला जी  घृत, सिन्दुर थार मस्तक सोहे देवा,  
शिव-शक्ति का बाला हो गणपत, देख भया मतवाला जी ॥1॥

राजा भी सुमर थान, परजा भी सुमर है  सुमर है जोगी जटावाला जी । उठ सँवरी दोपहरी तान सुमर देवा, रिद्धि सिद्धि देवणवाला ओ गणपत ॥2॥

ओढ़ पीत पीतम्बर सोहे देवा, गल फूलंडा री फूल मालाजी । सात सखी रल मंगल गाव देवा, बुद्धि को देवण हाला जो गणपत ॥3॥

नात गुलाब मिल्या, गुरु पूरा ,  हृदय में करियो उजाला जी ।भानीनाथ शरण सतगुरु की देवा,खोल्या 
भ्रम का ताला ओ गणपत ॥4॥


Ganesh Aaya Riddhi Sisshi Lyaya | गणेश आया रिद्धि सिद्धि ल्याया

गणेश आया रिद्धि सिद्धि ल्याया, भरया भण्डारा रहसी ओ राम,मिल्या सन्त उपदेशी,  
                    
गुरु मोंयले री बाताँ कहसी ,ओ राम म्हान झीणी झीणी बाता कहसी ॥टेर॥                                                                                                                                            
हल्दी का रंग पीला होसी, केशर कद बण ज्यासी ॥1

कोई खरीद काँसी, पीतल, सन्त शब्द लिख लेसी ॥2

खार समद बीच अमृत भेरी, सन्त घड़ो भर लेसी ॥3

 खीर खाण्ड का अमृत भोजन, सन्त नीवाला लेसी ॥4

कागा कँ गल पैप माला, हँसलो कद बण ज्यासी ॥5

ऊँचे टीले धजा फरुके, चौड़े तकिया रहसी ॥6

साध-सन्त रल भेला बैठ, नुगरा न्यारा रहसी ॥7


शरण मछेन्दर जती गोरख बोल्या, टेक भेष की रहसी ॥8