Friday, 14 August 2020

Itna to Krna Swami Jab Pran Tan Se Nikle | इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले

Itna to Krna Swami Jab Pran Tan Se Nikle | इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले

इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले,

गोविन्द नाम लेकर फिर प्राण तन से निकले 

इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले,


श्री गंगा जी का तट हो यमुना का बंसी वट हो,

मेरा संवारा निकट हो जब प्राण तन से निकले 

इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले,


सिर सोहना मुकट हो मुखड़े पे काली लट हो,

यही ध्याम मेरे घट हो जब प्राण तन से निकले 

इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले,


मेरा प्राण निकले सुख से तेरा नाम निकले मुख से,

बच जाऊ गोर दुःख से जब प्राण तन से निकले 

इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले,


उस वक़्त जल्दी आना मुझको न भूल ना जाना,

मुरली की धुन सुनाना जब प्राण तन से निकले 

इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले,


ये नेक सी अर्ज है मानो तो क्या हर्ज है 

ये दास की अर्ज है जब प्राण तन से निकले 

इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले,


Song: Itna to Krna Swami Jab Pran Tan Se Nikle | इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले


Friday, 10 July 2020

Bhola Bhang Tumhari, Ghotat Ghotat Hari | भोला भांग तुम्हारी, मैं घोटत-घोटत हारी

भोला भांग तुम्हारी, मैं घोटत-घोटत हारी



भोला भांग तुम्हारी, मैं घोटत-घोटत हारी
मुझसे न घोटी जाए
की तेरी एक दिनां की होए तो घोंटूं, रोज़ न घोंटी जाए

सुन गणपति की महतारी, घोंटो भांग हमारी
बिन भंग रहा नहीं जाए
गौरां तोकू छोड़ दऊँ भंग न छोड़ी जाए

जिस दिन से मैं ब्याही आई भाग हमारे फूटे
राम करे ऐसा हो तेरा सिल-बट्टा ही टूटे
हाँ टूटे - २

छले पड़ गए हाथों में, क्यों तरस न मोपे खाए
की तेरी एक दिनां की होए तो घोंटूं, रोज़ न घोंटी जाए
भोला भांग तुम्हारी, मैं घोटात-घोटात हारी...

क्रोध में आके शिव शंकर ने खोला अपना झोला
एक निकली चरस की गोली, एक भांग का गोला
हाँ गोला - २ 

गोला, गोली खाकर बोले क्रोध में यूं फरमाए
गौरां तोकू छोड़ दऊँ भंग न छोड़ी जाए

सुन गणपति की महतारी, घोंटो भांग हमारी
बिन भंग रहा नहीं जाए
गौरां तोकू छोड़ दऊँ भंग न छोड़ी जाए

भांग चढ़ाए जो मुझपे, मैं पूरी आशा करता
मन इच्छा पूरी करके मैं उनके संकट हरता
मै हरता - २
इसी लिए वो भक्त मेरा मुझमे ही आन समाए
अरे, गौरां तोकू छोड़ दऊँ भंग न छोड़ी जाए

सुन गणपति की महतारी, घोंटो भांग हमारी
सुन भोला भांग तुम्हारी, मैं घोटात-घोटात हारी

Bhajan : Bhola Bhang Tumhari, Ghotat Ghotat Hari | भोला भांग तुम्हारी, मैं घोटत-घोटत हारी

Man kahayo Meri Maay | मान कहयो मेरी माय, मनै सांवरियो परणाय

मान कहयो मेरी माय, मनै सांवरियो परणाय


मान कहयो मेरी माय, मनै सांवरियो परणाय |
सांवरियो परणाय मात मेरी, सांवरियो परणाय ||

ऐसे वर को क्या वरु जो, जनम और मर जाय |
वर करीये एक सांवरो रे, अमर चूड़ो हो जाय || 
 मान कहयो मेरी  ,,,,

जहर पियालो राणो भेजियो रे, दयो मीरा ने जाय |
कर चरणामृत पी गई रे, थे जाणो रधुनाथ |।
 मान कहयो मेरी ,,,, 

सर्प पिटारो राणो भेजियो रे, दयो मीरा ने जाय |
खोल पिटारो मीरा पहरियो रे, बण गयो नौशर हार || 
 मान  कहयो मेरी ,,,,

मीरा हर की लाडली रे, राणों बन को ठूंठ |
समझायो समझ्यो नहीं रे, ले जाती बैकुंठ || 
 मान कहयो मेरी ,,,,

मीरा जन्मी मेड़ते रे, राणों गढ़ चित्तोड |
कलियुग में भगति करी रे, गुरु मिल्या रैदास || 
मान कहयो मेरी ,,,,

Bhajan : Man kahayo Meri Maay | मान कहयो मेरी माय, मनै सांवरियो परणाय

Bole Nari Suno Piyaji Mano Mhari Bat | बोले नारी सुनो पियारी मानलो म्हारी बात

बोले नारी सुनो पियारी मानलो म्हारी बात


बोले नारी सुनो पियारी मानलो म्हारी बात 
द्वारका थे जाओ हे
थे जाओ पिया थे जाओ ओ 

माल उधारों मिले नहीं पीया
मुश्किल दाणे-दाणे की
दोय वक्त में एक व्रत थारे बिद लागे ह् खाने की
मीठी निकले भूख पिया, थारा दुर्बल हो गया गात 1
द्वारका थे जाओ,

आन गरीबी आ घेरी ,बर्तन ना फूटी कौड़ी । 
तन का वस्त्र फाट गया फिर फाटेड़ी चादर ओढी 
सिया मरता फिरे रात दिन दे काखा में हाथ 2
द्वारका थे जाओ 

जाकर भेंट करो हरि से पिव 
मन म कोई आँट करो 
अपने दिल की बात प्रभु से पिव
मन में कोई याद करो
सारी बातें समर्थ म्हारो देवर है ब्रजनाथ । 3

मोहे कहे मत भूलो प्रभु ने ,
याद करो थे चार घड़ी ।
लख चोरासि फिर आई 
या, चौपड़ गंदेस्यार पड़ी । मोहन के या रीत प्रभु की 
दे दुर्बल ने साथ ।। 4 ।।

Chal Ud Ja re Pakshi, Desh Hua Begana | चल उड़ जा रे पक्षी कि अब यह देश हुआ बेगाना

चल उड़ जा रे पक्षी कि अब यह देश हुआ बेगाना



चल उड़ जा रे पक्षी कि अब यह देश हुआ बेगाना

खत्म हुये दिन उस डाली पे जिसपर तेरा बसेरा था।
आज यहाँ और कल हो वहाँ, यह जोगी वाला फेरा था
ये तेरी जागीर नहीं थी चार घड़ी का डेरा था।
सदा रहा है इस दुनिया में किसको आवो दाना...। चल ।।
चल उड़ जा रे पक्षी कि अब यह देश हुआ बेगाना

तिनका-तिनका चुनकर तु ने नगरी एक बसाई
बारीस में तेरी भिगी पांखे धूप में गर्मी खाई ,
गम ना कर जो मेंहनत तेरे काम ना आई।
अच्छा है कुछ ले जाने से देकर ही कुठ जाना.. ।। चल।।
चल उड़ जा रे पक्षी कि अब यह देश हुआ बेगाना

भूल जा अब वो मस्त हवाएँ उड़ना डाली-डाली
जग की आँख का कांटा बन गई चाल तेरी मतवाली
कौन भला उस बाग को पुछे हो ना जिसका माली।
तेरी किस्मत में लिखा है जीते जी मरजाना.. ।। चल।।
चल उड़ जा रे पक्षी कि अब यह देश हुआ बेगाना

रोते है वो पंख पखेरू, साथ जा तेर खे ले
जिनके साथ लगाए तूने अरमानो के मेंले
भीगी अखिया से उनकी आज दुवाये ले ले।
कीसको पता है इस नगरी में कब हो तेरा आना...। । चल ।।

चल उड़ जा रे पक्षी कि अब यह देश हुआ बेगाना

Bhajan: Chal Ud Ja re Pakshi, Desh Hua Begana | चल उड़ जा रे पक्षी कि अब यह देश हुआ बेगाना

Devaki Ke Jatan Banu Main | हाँ देवकी के जतन बणाऊँ मैं Lyrics

हाँ देवकी के जतन बणाऊँ मैं



हाँ देवकी के जतन बणाऊँ मैं
इस बालक न गोकुल में किस ढाल पहुंचाऊँ मैं

गळ म तोख पड़्या मेरे हाथ हथकड़ी जड़ी हुई
हाल्या चाल्या जाता ना पाया म बेड़ी पड़ी होई
सांकळ ताले सब भीड़रे चोगङदे फाटक जड़ी हुई ।
कंस का है भारी पहरा बाहर पहरेदार खड़े 
हाथ म खड्ग लेके होके न हुँशियार खड़े
मतवाले से हाथी कुते दरवाजे से बाहर खड़े
 हाँ निकल किस तरियां जाऊं मैं --
मेरी खुले हथकड़ी बेड़ी फेर तो ना घबराऊँ मैं
देवकी के.....1

वासुदेव मन में घबराया ,काया म बेदन सी छिड़गी 
ईश्वर के करने से लोगोँ बेड़ी औऱ हथकड़ी झड़गी
ऐसी फिरि हरि की माया पहरे दाराँ पर माटी पड़गी
दोनुआं का मन बढ़या देख के न ऐसा हाल देवकी न चाह म भर के पालणे सुवाया लाल 
कृष्णजी ने सिर पर धर के चाल पड्या महि पाल ।।
हाँ देवकी तन समझाऊं मैं
तू ईश्वर रटती रहिए जब तक वापस आऊं मैं
देवकी.......2

वासुदेव चाल पड़्या देवकी स करके बात
भादवे की काली पीली गरजे थी अंधेरी रात
बेटे हाल चा मं भरके समझया कोन्या अपना गात ।
आगे जमना भरी हुई पीछे सिंह बोल रहया
कंस के बोलां का तीर काळजै न छोळ रहया
किस तरियां त जाया जागा, राजा का दिल डोल रहया
हाँ प्रभु तेरा शुक्र मनाऊँ मै --ं
यो बालक बचना चाहिए  बेशक तँ मर जाऊं मै 
देवकी के......3

वासुदेव चाल पड़्या मन में करके सोच विचार ।
आगे सी ने पहुंचे राजा बहै थी कसूती धार । वासुदेव भीतर बडग्या, देवता जल, नै छुछ कार ।
आगे सी न पहुंचे राजा नाक तक पाणी आया 
पिताजी न दुःखी देख कृष्णजी न पांव लटकाया 
चरण चुम के उत्तरी जमुना ऐसी फिरि हरि की माया
उठान
हाँ कथा कृष्ण की गाऊं मैं ---
कहे बाजे भगत सुसाने के ,ईब गुरु मनाऊँ मैं
देवकी......4

नाथ जी महाराज की जय

Ratinath Ji Mahima | ऐसै है रत्तिनाथ दयालु; महिमा वरणी न जावैजी

ऐसै है रत्तिनाथ दयालु; महिमा वरणी न जावैजी



ऐसै है रत्तिनाथ दयालु; महिमा वरणी न जावैजी,
बड़ा भाग है उस नर का जो सतगुरु किरपा पावै जी ।।

जन्म मरण का फंद छुड़ावै, अमर राह बतलावें जी,
निराकार साकार दरसावै, सदा ज्ञान समझावै जी ।।

तत्व ज्ञान का तत्व निराला, धनगुरू आप लखावै जी
राईके औलै पर्वत्त को, गुरांसा भेद बतावै जी 

बऊ धाम रज मस्तक धारे, विपदा नही सतायै जी ,
ज्ञान भक्ती बेराग गुरु कै, आशीर्वाद सँ आवैजी ।।

भरम नी'द मं सूत्यों रैं हंसलो, धनगुरू आय जगावै जी,
भव से पार करो जी दयालू, सखिया मंगल गावैजी ।।

बौल नाथजी महाराज कीं जय
बौल बऊ धामकीं जय
बौल बाबौजी रतिनाथ जी महाराज की जय

Bhajan : Ratinath Ji Mahima | ऐसै है रत्तिनाथ दयालु; महिमा वरणी न जावैजी