Showing posts with label nath ji bhajan. Show all posts
Showing posts with label nath ji bhajan. Show all posts

Monday, 13 August 2018

मेवाड़ी राणा, भजनाँ सँ लागै मीरा मीठी | Mevadi Rana Bhajana Se Lag Mera Meethi


मेवाड़ी राणा, भजनाँ सँ लागै मीरा मीठी।उदयपुर राणा, भजनाँ सँ लागै मीरा मीठी॥टेर॥
 थारो तो राम म्हानै बतावो, नहीं तो फकीरी थारी झूठी॥1॥
म्हारो तो राम राणाजी घटघट बोलै, थारै हिये की कियाँ फूटी॥2॥ 
सास नणद दोराणी, जिठाणी, जलबल भई अंगीठी॥3॥
थे तो साँवरिया म्हारै सिर का सेवरा, म्हें थारै हाथकी अंगूठी॥4॥ 
सँकडी गली मँ म्हानै गिरधर मिलियो, किस बिध फिरुँ मैं अपूठी॥5॥
बाई मीरा के प्रभु गिरधर नागर, चढ़ गयो रंग मजीठी॥6॥

Sunday, 11 June 2017

करमाँ रो संगाती राणा कोई नहीं | Karma Ro Sangati Rana Koi Nahi

करमाँ रो संगाती राणा कोई नहीं-लाग्यो लाग्यो राम भजन से हेत ॥टेर॥ 

एक माँटी रा दोय घड़कल्या, जाँरो न्यारो न्यारो भाग। एक सदाशिव कै जल चढ़ै, दूजो शमशाणा मँ जाय॥1॥

 एक गऊ का दोय बाछड़ा, जाँरो न्यारो न्यारो भाग। एक सदाशिव कै नाँदियो, दूजो बिणजारै रो बैल॥2॥

 एक मायड़ रै दोय डीकरा, जाँरो न्यारो न्यारो भाग। एक राजेश्वर राजवी, दूजो साधुड़ाँ रै लार॥3॥ 

राठौड़ाँ रै मीरा बाई जलमिया, बानै बैकुण्ठाँ रा बास॥4॥

साधु लडे रे शबद के ओटै | Sadhu Lade Shabad Ke Aute

साधु लडे रे शबद के ओटै, तन पर चोट कोनी आयी मेरा भाई रे, साधा करी है लड़ाई....ओजी म्हारा गुरु ओजी...॥टेर॥ 

ओजी गुरुजी, पाँच पच्चीस चल्या पाखारिया आतम करी है चढ़ाई । आतम राज करे काया मे, ऐसी ऐसी अदल जमाई ॥1॥

 ओजी गुरुजी, सात शबद का मँड्या है मोरचा, गढ़ पर नाल झुकाई ।ग्यान का गोला लग्या घट भीतर, भरमाँ की बुरज उड़ाई ॥2॥

 ओजी गुरुजी, ज्ञान का तेगा लिया है हाथ मे, करमा की कतल बनाई ।कतल कराइ भरमगढ़ भेल्या, फिर रही अलख दुहाई ॥3॥

 ओजी गुरुजी, नाथ गुलाब मिल्या गुरु पूरा, लाला लगन लखाई । भानी नाथ शरण सतगुरु की, खरी नौकरी पाई ॥4॥

समझ मन माँयला रै | Samajh Man Mayala Re

समझ मन माँयलारै, बीरा मेरा मैली चादर धोय। बिन धोयाँ दुख ना मिटै रै, बीरा मेरा तिरणा किस बिध होय॥टेर॥



देवी सुमराँ शारदा रै, बीरा मेरा हिरदै उजाला होय। गुरुवाँ री गम गैला मिल्या रे, बीरा मेरा आदु अस्तल जोय॥1॥



दाता चिणाई बावड़ी रै, ज्यामें नीर गगजल होय। कई कई हरिजन न्हा चल्या रै, कई गया है जमारो खोय॥2॥



रोईड़ी रंग फूटरो रै, जाराँ फूल अजब रंग होय। ऊबो मिखमी भोम मे रै, जांकी कलियन विणजै कोई॥3॥



चंदन रो रंग सांवलो रै, जाँका मरम न जाने कोय।  काट्या कंचन निपजै रै, ज्यामे महक सुगन्धी होय॥4॥



तन का बनाले कापडा रै, सुरता की साबुन होय। सुरत शीला पर देया फटकाया रै, सतगुरु देसी धोय॥5॥



लिखमा भिखमी भौम में रै, ज्याँरो गाँव गया गम होय। तीजी चौकी लांधजा रै, चौथी में निर्भय होय॥6॥

सतगुरु पुरा म्हाने मिल्या है सुमरतां | Satguru Pura Mhane Milya Hai Sumarta


सतगुरु पुरा म्हाने मिल्या है सुमरतां, पियाजी री छतरी बताओ जी॥टेर॥


कहाँ सेती तुम चलकर आया रे, कुण थाने रस्ता बताया जी, कहाँ तेरा स्थान कहीजै रे, सो मोहे दरसाओ जी॥1॥


नाम नगर से चलकर आया रे, सतगुरु रस्ता बताया, भवसागरिये मे तीरना उपर, पकड़ भुजा सतगुरु ल्याया॥2॥

चढ़ छतरी पर मगन भया है रे, भँवर कुसाली पे आया, सात सखी रल मंगल गावै, जमड़ा देखत रोया॥3॥ 

नवलनाथ जोगी पुरा म्हाने मिलिया, रब का रस्ता बताया, भणत कमाल नवल थारे शरणे, बैठ तन्दूरे पे गाया॥4॥